जीते रहने की कोई वजह नहीं पर ज़िन्दगी बेवजह तो नहीं!

जीते रहने की कोई वजह नहीं
पर ज़िन्दगी बेवजह तो नहीं!

तलाश थम गई
प्यास बुझ गई
जब से जाना
ए ज़िन्दगी तुझे…

भागते फिरने की अब कोई वजह नहीं
पर बैठे सोए रहना भी तो ज़िन्दगी नहीं

ग़ाफ़िल-सा रहता हूँ
तेरे संग चलता रहता हूँ

ए ज़िन्दगी

खुद में लीन तुम में तल्लीन रहता हूँ
यूँ बरसों से दीवानापन जिया करता हूँ

तेरे ही हवाले कर दिया अब
बहुत सुकूँ महसूस करता हूँ

बिछड़ गया पूरे ज़माने से, ग़म नहीं
तेरे राह चलने में ये जीवन कम तो नहीं।।

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