हम बस रोबोट हैं!

स्वामी भड़ासानंद

हम अपनी मर्जी से जीते हैं, ये एक भ्रम है। हम बस रोबोट हैं। जो टास्क फीड है, वो अचीव करने की कोशिश करते हैं।

जो व्यक्ति स्वयं के रोबोट होने की रियल्टी को समझ कर खुद की चेतना को एक वर्जन अपग्रेड कर ले और अपना जीवन टास्क विहीन घोषित कर दे, वह दरअसल जग चुका मनुष्य है।

जगे हुए मनुष्य का कोई निजी दुख सुख नहीं होता। जगा हुआ मनुष्य प्रकृति / परमात्मा / ईश्वर / परमसत्ता के करीब होता है। जगे हुए मनुष्य की नज़रों में सिर्फ करुणा और प्रेम होता है।

द्वारा स्वामी भड़ासानंद यशवंत
संपर्क SwamiBhadasanand@gmail.com

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