प्लीज, कुछ न करें…

सोच रहा हूँ अब क्या करूँ? हमारा चित्त कुछ न कुछ करते रहने के लिए प्रोग्राम्ड है। कुछ न करने की अवस्था को सामाजिक तौर पर अच्छा नहीं माना जाता। बेकार, आलसी, धरती पर बोझ से लेकर घर घुसना तक जाने क्या क्या सम्बोधित किया जाता है।

हम मनुष्यों ने कुछ कर गुजरने के दबाव के चलते धरती आसमान नदी तालाब समंदर जीव वनस्पतियों का सत्यानाश कर डाला।

इसलिए अब हाथ जोड़कर प्रार्थना है। प्लीज, कुछ न करें। बस बहुत हो गया।

अब जहां हैं वहीं शांति से बैठ जाएं ताकि दूसरे भी शांत जीवन जी सकें।

अतः मैँ भी कुछ करने नहीं जा रहा। दिमाग की आदिम प्रोग्रामिंग ट्रेनिंग को पलट रहा हूँ।

सक्रिय से अक्रिय की ओर रिवर्स गीयर में खुद के देह दिमाग वाली गाड़ी इंजन को डाल रहा हूँ

🤓❤💐👏🏻

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