मार्च ऑन चिड़ियों, हम तुम्हारे साथ हैं!

Yashwant Singh : दिल्ली लौटने का दिल नहीं कर रहा। गांव में इतना ऑक्सीजन है कि लग रहा जैसे अमृत को एयर फॉर्मेट में इन्हेल कर रहा हूँ।

धूप में खटिया पर नंगे बदन लेटने से भले ही पीठ पर सुतलियों की छाप पड़ जाए लेकिन मटर की फली को चिड़ियों द्वारा तने पर लटक कर खाते हुए देखना सबसे मजेदार अनुभव है।

आदमी के कब्जे वाले राजपाठ में जीव जंतु को जहां भी धावा बोलते, अटैक करते, अपना हक़ छीनते देख लेता हूँ, वहीं मैं धरती के सर्वाधिक संसाधनों पर काबिज बर्बर मनुष्यों के खिलाफ गैर-मनुष्यों के विद्रोह की कल्पना से रोमांचित हो जाता हूँ!

मार्च ऑन चिड़ियों, हम तुम्हारे साथ हैं!

वैसे ये पोस्ट मेरे घर वाले पढ़ लें तो मुझे ही गरियायेंगे, क्योंकि खेती उनकी ही है.

12 February 2019 को फेसबुक पर प्रकाशित किया गया.

Share:

One thought on “मार्च ऑन चिड़ियों, हम तुम्हारे साथ हैं!

  1. जहानाबादी खटिया तोड़ देलहुं यशवंत भाई ? पीठ पर खटिया के ओरचन के निशान बता रहलो हे कि खटिया तोड़ दिहिस जवान……गाँव के बाते कुछुओ अऊर होखअ हई भीया….जाड़ा में मटर के घुघुनी भर-भर कटोरा खाईये लेलहुं त बूंट के झंगरी के भभरा भी खाईये के दिल्ली लौटे के पोरोग्राम बनावअ….गाँव में अगजा के सांझ में हरियर बूंट के भभरा खाए के सोअरथ, बहुते कम्मे लोग के भेंटा हो भीया, तोहरा इ सौभाग्य भेंटा गेल्लो, इर्ष्या हमनी के हो रहलो हे…..होली के कादो-कीचड़ खेले के बड़े लौटे के चाहीं दिल्ली…..ठीक है ? 😉

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *