जीवन में पहली दफे चौबीस घंटे तक मौन व्रत का अनुभव

जीवन में पहली दफा आज आंख खुलने के बाद से मौन हूँ। इच्छा बहुत दिन से थी। पर कर आज रहा हूँ। मौन एक शुरुआती सीढ़ी है अंतर्यात्रा की।

उपनिषद में हवा/वायु को साक्षात ब्रम्ह कहते हुए प्रणाम किया गया है।

हवा को हम देख नहीं सकते, बस महसूस कर सकते हैं।

हवा सांस में है। इसका साक्षात दर्शन सम्भव नहीं। पर इसके बगैर जीवन नहीं।

तो ये साक्षात ब्रम्ह है।

ब्रम्ह ऐसा ही है। जो है पर दृश्य नहीं है। महसूस करने पर उसे जाना जा सकता है।

आज रात्रि उपनिषद पढ़ रहा।

आज 24 घण्टे मौन रहने का आनन्द जबरदस्त रहा।

इस मौन से दो बड़े फायदे महसूस किए।

बाहरी जगत में दूसरों की इच्छा के अनुकूल सक्रियता का स्तर भारी मात्रा में घट गया।

इस मौन से खुद की इच्छाओं-आवेगों को स्थिर रखने, इन्हें समझने और इन्हें रूपांतरित करने में मदद मिली।

द्वारा स्वामी भड़ासानंद यशवंत
संपर्क SwamiBhadasanand@gmail.com

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