रोजाना एक नींबू पीकर कैंसर का खतरा टाल सकते हैं!

आज विश्व कैंसर दिवस है। कैंसर हमें भी हो सकता है। आपको भी। हो सकता है हममें से किसी के कैंसर का इलाज चल रहा हो। किसी का चलने वाला हो।

दुनिया में हर 5वें पुरुष और 11वीं स्त्री को जीवन के किसी मोड़ पर कोई न कोई कैंसर हो जाता है। इस आंकड़े से मुझे बड़े भाई और वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह जी ने अवगत कराया। उनने ये भी दावा किया कि अगर आप रोज एक नींबू पीते हैं और उस नींबू का छिलका चबा जाते हैं तो कैंसर कभी न होगा। अच्छी सलाह मान लेनी चाहिए।

शहर में बिकने वाले नींबू का छिलका चबाना उचित न होगा पर पूरा रस निचोड़ कर पिया जा सकता है। जिनके पास नींबू के पेड़ हों, वो छिलका चबा सकते हैं।

पर शहरी जीवन में नींबू का पेड़ कहां मिलेगा। यहां तो कण-कण में प्लास्टिक के पेड़ उगे मिलेंगे। ये प्लास्टिक तो शहरी जीवनचर्या के क्षण क्षण में घुसे हैं। प्लास्टिक में चाय, प्लास्टिक में भोजन, प्लास्टिक में दूध, प्लास्टिक में सब्जी, प्लास्टिक में पानी। ये प्लास्टिक ही कैंसर है। अपने जीवन से प्लास्टिक निकाल फेंकिए। बाहर का भोजन छोड़ दीजिए।

जितना हो सके हर्बल भोजन और जीवन अपनाइए। प्रदूषित हवा वाले समस्त शहरों के निवासी धूम्रपान कर फेफड़े को हर कश के साथ एक कदम कैंसर की ओर बढ़ा लेते हैं। यही हाल गुटखे का है। मुख कैंसर के लिए पान गुटखा जिम्मेदार है।

यह सब जब लिख रहा हूँ तो देश में कोई न कोई व्यक्ति जांच के बाद कैंसर पीड़ित घोषित किया जा रहा होगा। कोई न कोई व्यक्ति कीमियोथिरेपी के दानव को झेलते हुए चीत्कार कर रहा होगा। कोई न कोई व्यक्ति इलाज में लाखों रुपए गंवाने के बाद भी कैंसर के चलते जीवन को गुडबॉय कह रहा होगा।

विश्व कैंसर दिवस पर हम थोड़ा हर्बल हो जाने का इरादा कर लें, एक नींबू दोपहर से पहले रोजाना पीने की ठान लें और प्लास्टिक-सिगरेट-गुटखा को पूरी तरह ना कहने का लक्ष्य घोषित कर लें तो मैं समझूंगा मेरा लिखना सार्थक हुआ।

हो सके तो इसे पढ़ने के बाद दूसरों को भी पढ़ाएं. ध्यान रखें, बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है.

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