आनंदित होना होगा तो नरक में भी सुकून मिल जाएगा

एक बुजुर्ग महिला रात भर चिल्लाती रहीं। मैं रात भर बुद्ध बना रहा। कब आंख खुल जाती, कब तेज कराह और रुलाई सुन एकदम से उठ जाता, कब उनकी चीख पर ध्यान लगाकर पूरे ब्रम्हांड में फैली ऊर्जाओं से कारण-निवारण पूछ आता, अब कुछ याद नहीं करना रखना चाहता।

फिलहाल सबकी नींद खाकर अब वो शांत टुकुर टुकुर निहार रहीं हैं। भरा पूरा परिवार उनके साथ है। बारी बारी से सभी उनकी सेवा टहल में रात भर लगे रहे। बताए लोग कि फालिज मार दिया है। दिल्ली से इलाज करवा कर गोरखपुर लौट रहे हैं।

आधा फर्स्ट और आधा सेकंड एसी वाले इस डिब्बे में नींद किसी को न आई क्योंकि सबने किसी न किसी वक़्त कुछ न कुछ इस चिल्लाहट को लेकर बोला, पूछा और खुद को इस डब्बे में होने पर कोसा। मामला बुजुर्ग और बीमार महिला का था तो खुल कर कोई कुछ कह भी नहीं पा रहा था, क्योंकि सबकी एक-एक मां-दादी होंगी और सबको एक दिन बुजुर्ग बीमार होना है।

थोड़ा स्वार्थी होकर मैं सोचने लगा तो अंदर से आवाज़ आयी- ”बेटा, चाहें फर्स्ट एसी में बैठो या जनरल में, दुःख पीछे पड़ेगा तो हर मोड़ पर तोड़ेगा। आनंदित होना होगा तो नरक में भी सुकून मिल जाएगा।”

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